Tuesday, 2 July 2013

इस रात की सुबह नहीं


आज से कुछ महीने पहले ये शीर्षक किसी टीवी धारावाहिक में दिखाई जा रही एक मासूम बच्ची के जीवन की कहानी को दिया गया था। पर कुदरत ने जो तबाही कुछ दिन पहले उत्तराखंड में मचाई उसके बाद येही लगता है की इसका असली हकदार खौफ और दर्द का ये मंज़र ही है।
ना जाने कितने लोगों की ज़िन्दगी ख़त्म हो गई, कितनो की बिखर गई। मैं आज भी जब कोई न्यूज़ चैनल लगाता हूँ तो नम आँखों में भीगा कोई न कोई मजबूर चेहरा दिख ही जाता है टीवी स्क्रीन पर। हिम्मत नहीं होती अब तो न्यूज़ लगाने तक की। जिन पर बीती है जाने उनका क्या हाल होगा। कोई अपना दुनिया छोड़कर चला गया ये बात पत्थर के सीने को भी पिघल जाने पर मजबूर कर देती है, फिर यहाँ तो कई माओं ने अपने बच्चे खोये हैं, और कई बच्चों को तो इतना तक नहीं पता की उनके माँ बाप जिंदा हैं के मर गए।
अपने बाप की लाश की छाती पर बैठा एक ६-७ साल का बच्चा इंतज़ार में है की कब उसका बाप उठेगा और उसे खाने को कुछ देगा , उसे इंतज़ार इस बात का भी है की बीते दिनों जो बाढ़ उसकी माँ और छोटी बहन को अपने साथ ले गई वो उन्हें कभी तो उसके पास वापिस छोड़ जाएगी। पेट में भूख की आग लगी है लेकिन रोने की वजह भूख नहीं है।
एक माँ है जो की अपने बेटे की लाश को छोड़कर जाना नहीं चाहती, उसी के साथ मर जाने की जिद्द लिए बैठी है, उसी इंतजार में है की फिर से एकबार पैरों के नीचे की ज़मीन धंस जाये और वो अपने बेटे को गोद में लिए उसमें दफन हो जाये। ऐसी ही कितनी इंतज़ार करती आँखें हैं वहां। उन लोगों के इंतज़ार को तो शायद हम ना दूर कर पाएं लेकिन कम से कम एक कदम उनकी तरफ मदद का तो बढ़ा सकते हैं, ताकि अपनों की यादें दिल में लिए उन्ही की ख़ुशी की खातिर वो अपनी ज़िन्दगी को शुरू करने की कोशिश कर सकें, फिरसे!

मैं जानता हूँ ये उनके लिए आसान नहीं होगा, क्यूंकि रात अभी शुरू हुई है, अभी अँधेरे का गहराना बाकि है, अभी तो अपनों की याद में रोना बाकि है, जब जब उस खौफनाक मंज़र का साया ज़हन में जिंदा होगा हर उस लम्हे में इन लोगो को मौत देकर जायेगा, फिर भी, कम से कम जो हमसे बन पड़े वो तो हम कर ही सकते हैं।
इसी उम्मीद से आज अपने मन में आ रहे सभी ख्यालों को शब्दों में तब्दील कर पाया हूँ। दरअसल मैं एक अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट हूँ, बिना नौकरी या कारोबार के पैसे नहीं आ सकते और पैसों या जरूरत की चीज़ें देने के अलावा कोई और मदद हम कर नहीं सकेंगे, इसीलिए इस ब्लॉग की शुरुआत करने जा रहा हूँ, इससे होने वाली सारी कमाई मुसीबत में फंसे लोगो को फिरसे नयी उम्मीद देने के लिए की जाएगी। तो आप सबसे इतना ही अनुरोध है की इसे नयमित तोर से पड़ें और अपना योगदान दें और साथ ही दें किसी जरूरतमंद को,

एक उम्मीद, ज़िन्दगी की!

-विशाल वर्मा

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